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चिप्स,कुरकुरे के पैकेट में हवा

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आमतौर पर आपने देखा होगा कि चिप्स और कुरकुरे के पैकेट में हवा भरी होती है, अब आपमें से कुछ कहेंगे की ज्यादा दिखाने के लिए ऐसा किया जाता है।हां  कुछ हद तक ये सही भी है पर इसका एक मुख्य कारण कुछ और है। तो जानते है वो ऐसा क्यू करते है। चिप्स कुरकुरे आदि के पैकेट में नाइट्रोजन गैस भरी होती है ये गैस उस समय अक्रियाशील होती है जब इसे तेल और वसा वाले पदार्थो के साथ भरा जाता है, और पैक कर दिया जाता है।वातावरण की ऑक्सीजन तुम्हारे चिप्स, कुरकुरे तक नही पहुँच पाती और उसका ऑक्सीडेशन नही होगा। ये नाइट्रोजन गैस चिप्स ,कुरकुरे की रंसिडिटी(rancidity) को रोकती है।अगर रंसिडिटी हो गयी तो एक स्मेल आना शुरू हो जायेगी जिसे हम सेव,चिप्स या तली हुई चीजो का तेल छोड़ना कहते है।फिर ये चीजें खाने योग्य नही रह जाती। किसी भी प्रकार से रंसिडिटी को रोकने के लिए ही हम फैट्स और आयल वाली चीजों को एयर टाइट बॉक्स में रखते है,सीधे प्रकाश में नही रखते है,फ्रीज में रखते है या खाने में एंटी-ऑक्सीडेंट्स मिला देते है। तो अब आप समझ गए होंगे कि सिर्फ बड़ा दिखाने के लिए ही नहीं बल्कि ल...

नार्को(narco) टेस्ट

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आपने कभी ना कभी ये शब्द सुना होगा, और जब बात झूट पकड़ने की आ जाए तो यही टेस्ट दिमाग में आता है कि, नार्को टेस्ट करवाके झूट और सच पकड़ा जा सकता है। तो क्या सच में ये टेस्ट झूट को पहचान लेता है, तो जानते है, कि ये केसे काम करता है और किस तरह से छूट पकड़ता है। वास्तव में कोई भी व्यक्ति अपनी कल्पना का इस्तेमाल करके झूठ बोलता है।अगर व्यक्ति की कल्पना करने की शक्ति को कुछ समय के लिए किसी तरह रोक दिया जाए तो वह झूठ नही बोल पायेगा। नार्को टेस्ट में व्यक्ति की इसी कल्पना करने की शक्ति को कमजोर बना दिया जाता है।इसके लिए उसे सोडियम पेंटोथल या सोडियम अमाइटल का  इंजेक्शन दिया जाता है। इंजेक्शन के प्रभाव से उस व्यक्ति की समझने-बुझने की शक्ति कुछ समय के लिए क्षीण हो जाती है। अब जब उससे इस दशा में सवाल किये जाते है तो वह जवाब में झूठ नही बोल पाता। क्योंकि उसकी कल्पना करके झूट बोलने की शक्ति क्षीण हो चुकी होती है, और वह फेर बदल किए बिना सही सही जानकारी ही दे पाता है।  इसका एक नाम ' ट्वायलाइट स्लीप 'भी है। तो अब आप समझ गए ये टेस्ट केसे काम करता है। मन का कोई ...

बादलों के अलग अलग रंग

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जब भी हम  आसमान  की तरफ देखते हैं,  सफेद,स्लेटी व काले  रंग के बादलों से ढका एक विशाल नीला आसमान दिखाई देता है। ज़्यादातर  बादल   सफेद  होते हैं, लेकिन जब आंधी या बारिश होने वाली होती है, तो  काले बादल  छा जाते है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि बादल सफेद, स्लेटी या काले क्यों होते हैं? जैसा कि आपको पता है, बदल पानी कि छोटी छोटी बूंदों छोटे छोटे बर्फ के टुकड़ों से बना होता है। ये बादलों के अलग अलग रंग होने का कारण है, सघनता ।  जो बादल कम सघन होते है वो हमें ऊपर दिखते है सफेेद दिखते है, सघनता कम होने के कारण सूर्य का प्रकाश बादलों  के आर पार हो जाता है और बादलों मे घुल जाता है और हमारी आँखों पे गिरता है सघनता कम होने के कारण प्रकाश  का परावर्तन पूर्ण रूप से हो जाता है जिससे हमें उनका रंग सफ़ेद दिखाई देता है  इसके विपरीत जो बादल  अधिक सघन होते है वो सफ़ेद की तुलना मे निचे बनते है तथा काले रंग के होते है क्यूकी अधिक सघनता के कारण सूर्य का प्रकाश उनमे से निचे नहीं आ पाता  और बदलो के द्वारा ...

कुल्फी वाला बर्फ में नमक क्यों डालता है?

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क्या आपने कभी सोचा है कि वो ऐसा क्यों करता है। हां आपमें से कुछ कहेंगे कि बर्फ में नमक डालने से बर्फ कम पिघलती है। हा ये सही है पर ये ऐसे काम करता है:-- आइसक्रीम या कुल्फी का फ्रीजिंग पॉइंट है -5 डिग्री सेल्शियस (लगभग) होता है। अब ये बर्फ के फ्रीजिंग पॉइंट 0 डिग्री सेल्शियस से भी कम है।अब परेशानी ये रहेगा की यदि आइसक्रीम जमाने के लिये केवल बर्फ का उपयोग किया तो आइसक्रीम जमने के पहले बर्फ पहले पिघल जायेगी। तो इसका उपाय है। नमक(salt)   नमक हमे इसका हल दे देता है। ये बर्फ के साथ होने पर उसके फ्रीजिंग/मेल्टिंग पॉइंट को कम कर देता है मतलब अब बर्फ पिघलेगी लगभग -20 डिग्री सेल्शियस पर।(पिघली भी तो ताप नही बदलेगा पानी का)।अब आइसक्रीम तो -5 डिग्री सेल्शियस के लगभग पर ही जम जायेगी।  मन का कोई सवाल या विचार आप कमेंट कर सकते है।manish sharma logicserver.blogspot.com

दूरी और विस्थापन

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अगर आप सोचते हो की विस्थापन और दूरी दोनों एक ही है,ये सोचना गलत है  किसी वस्तु द्वारा तय किए गए मार्ग की लंबाई को दूरी कहते है, जबकि किसी वस्तु द्वारा तय किए गए मार्ग के प्रारम्भ बिंदु व मार्ग के अंतिम बिंदु के बीच की लंबवत (सीधी) दूरी को विस्थापन कहते है। दोनों राशियों का मात्रक मीटर होता है  चित्र के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है, की वास्तविक मार्ग की लंबाई दूरी  कहलाती है,  जबकी मार्ग के प्राारम्भ व अंतिम बिंंदु की बीच की सीधी दूूूूरी को विस्थापन कहते है। मन का कोई सवाल या विचार आप कमेंट कर सकते है।      manish sharma logicserver.blogspot.com

विस्थापन

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सामान्यतः हम दूरी और विस्थापन को एक ही समझ लेते है। परन्तु इनमें अंतर होता है।  मान लीजिए आप एक पार्क के चक्कर लगाते है और चक्कर लगाने के बाद आप वहीं आ जाते है जहां से आपने चक्कर लगाना शुरू किया था, तो आपको जानकर हैरानी होगी की आपका विस्थापन 0 होगा।  एक निश्चित दिशा में दो बिंदुओं की बीच की लंबवत (न्यूनतम) दूरी को विस्थापन कहते है।  विस्थापन सिर्फ प्रथम बिंदु और अंतिम बिंदु की बीच की सीधी दूरी होती है। इसका मात्रक मीटर होता है।यह एक सदिश राशि है। मन का कोई सवाल या विचार आप कमेंट कर सकते है। manish sharma logicserver.blogspot.com

प्रकाशवर्ष

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जैसा कि नाम से बोध हो रहा है।...  1 प्रकाश वर्ष से तात्पर्य है, प्रकाश द्वारा 1 वर्ष में तय की गई दूरी। ये दूरी का मात्रक है। इसका उपयोग लंबी दूर मापने की लिए किया जाता है।                प्रकाश की चाल = 3×10^8 मी./से.                1 प्रकाश वर्ष = 9.46×10^15 मीटर   अब आप सोच सकते है कि ये दूरी कितनी ज्यादा बड़ी होगी। हालांकि ये दूरी की सबसे बड़ी इकाई नहीं है। दूरी की सबसे बड़ी इकाई है  पारसेक है।                       1  पारसेक = 3.26 प्रकाश वर्ष ये दूरी मापने की इकाईया सामान्य व्यवहार में उपयोग में नहीं आती है। इनका उपयोग अंतरिक्ष में किसी पिंड की दूरी मापने के लिए किया जाता है।  मन का कोई सवाल या विचार आप कमेंट कर सकते है। manish sharma logicserver.blogspot.com