नार्को(narco) टेस्ट

आपने कभी ना कभी ये शब्द सुना होगा, और जब बात झूट पकड़ने की आ जाए तो यही टेस्ट दिमाग में आता है कि, नार्को टेस्ट करवाके झूट और सच पकड़ा जा सकता है।

तो क्या सच में ये टेस्ट झूट को पहचान लेता है, तो जानते है, कि ये केसे काम करता है और किस तरह से छूट पकड़ता है।


वास्तव में कोई भी व्यक्ति अपनी कल्पना का इस्तेमाल करके झूठ बोलता है।अगर व्यक्ति की कल्पना करने की शक्ति को कुछ समय के लिए किसी तरह रोक दिया जाए तो वह झूठ नही बोल पायेगा। नार्को टेस्ट में व्यक्ति की इसी कल्पना करने की शक्ति को कमजोर बना दिया जाता है।इसके लिए उसे सोडियम पेंटोथल या सोडियम अमाइटल का  इंजेक्शन दिया जाता है। इंजेक्शन के प्रभाव से उस व्यक्ति की समझने-बुझने की शक्ति कुछ समय के लिए क्षीण हो जाती है।


अब जब उससे इस दशा में सवाल किये जाते है तो वह जवाब में झूठ नही बोल पाता। क्योंकि उसकी कल्पना करके झूट बोलने की शक्ति क्षीण हो चुकी होती है, और वह फेर बदल किए बिना सही सही जानकारी ही दे पाता है।  इसका एक नाम 'ट्वायलाइट स्लीप'भी है।

तो अब आप समझ गए ये टेस्ट केसे काम करता है।


मन का कोई सवाल या विचार आप कमेंट कर सकते है।manish sharma

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