ध्वनि(sound)

आज हम इसी पे बात करने वाले है, और इसी कि कुछ रोचक जानकारियों से रूबरू होंगे।

ध्वनि:-

ध्वनि एक प्रकार का कम्पन है जो ठोस, द्रव और गैस तीनों में संचरण कर सकता है वास्तव में कम्पन ही ध्वनि है।

जब जब कम्पन होगा ध्वनि उत्पन्न होगी।



ध्वनि को संचरण के लिए माध्यम कि आवश्यकता होती है। निर्वात में ध्वनि गमन नहीं करती। यानी कि अंतरिक्ष में आपको कुछ सुनाई नहीं देगा।

ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है जिसकी चाल 332 मीटर प्रति सेकंड( वायु में) होती है ये चाल, दाब-ताप और माध्यम बदलने से बदल जाती है।

मानव के कान केवल 20Hz से लेकर 20 kilo Hz के बीच की ध्वनि ही सुन सकते है।

ध्वनि की गति सबसे ज्यादा ठोस में होती है उसके बाद द्रव में ओर अंत में वायु में।  इसका कारण है कणों में मध्य दूरी का कम ज्यादा होना।



ठोस में कणों के मध्य दूरी कम होती है जिससे ध्वनि की गति तेजी से आगे बढ़ती जाती है जबकि द्रव और गैस में
कणों कि गति दूर दूर होने के कारण ध्वनि की गति कम होती जाती है क्योंकि कम्पन को लगातार बनाए रखने के लिए कणों का पास पास होना जरूरी होता है।

आप जब बोलते हो तब भी गले में कम्पन के कारण आप बोल पाते हो शब्दों का उच्चारण कर पाते हो।

कम्पन कि Wavelength (तरंगदैर्घ्य) से पता चलता है कि आवाज कैसी होगी पतली, मोटी, भारी, या अन्य कोई।

ध्वनि तरंगों टकरा कर वापस भी आती है जब ऐसा होता है तो उसे प्रतिध्वनि (echo) कहा जाता है।



संगीत यंत्रों पर भी जब कम्पन किया जाता है तभी वे ध्वनि उत्पन्न कर पाते है, अब चाहे वो आप ताप देके करो या तारो और हिला कर।

ध्वनि के बारे में और भी कुछ जानने के लिए नीचे कमेंट कर सकते है। अपना सवाल पूछ सकते है।


मन का कोई सवाल या विचार आप कमेंट कर सकते है।manish sharma


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