मात्रको का निर्धारण
क्या आपने कभी सोचा है कि ये मात्रकों का निर्धारण किसने किया?
1 मीटर कितना लंबा होगा ये फिक्स है किसने फिक्स किया?
1 सेकंड कितना समय होगा ये किसने फिक्स किया?
1 किलोग्राम कितना भारी होगा ये किसने फिक्स किया?
ये सभी सवाल कभी ना कभी आपके दिमाग में जरूर आए होंगे। और आपने इन्हे छोड़ दिया होगा। पर आज हम इन्हीं पे बात करेंगे कि इन मूल मात्रकों को फिक्स किसने किया जिसका उपयोग आज पूरी दुनिया कर रही है।
इन सभी मात्रकों का निर्धारण नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड एंड टेक्नोलॉजी यू. एस. द्वारा किया जाता है।
1 मीटर -
1 मानक मीटर वह लम्बाई है जो पेरिस में रखी हुई प्लेटिनम-इरेडियम (90% प्लेटिनम तथा 10% इरेडियम) की छड़ पर अंकित दो चिन्हों के बीच की दूरी है। छड़ का ताप 0°C हो।
परंतु अब ये मानक बदल दिया गया है, क्योंकि ये मानक नष्ट हो सकता है। इस लिए 1983 में नए रूप में परिभाषित किया गया
1 मीटर वह दूरी है जो प्रकाश द्वारा 1 सेकंड के 29,97,92,458 वें भाग में निर्वात में तय की जाती है। अर्थात 1/29,97,92,458 सेकेंड में प्रकाश द्वारा चली गई दूरी 1 मीटर कहलाती है।
1 किलोग्राम -
'ली ग्रैंड के' लंदन में निर्मित 90 प्रतिशत प्लेटिनम और दस प्रतिशत इरिडियम से बना 4 सेंटीमीटर का एक सिलेंडर है, इसी को आधार मानकर भार कि इकाई मापी जाती थी
ये मानक भी अब बदल दिया गया है क्युकी समय के साथ परमाणुओं कि संख्या में परिवर्तन हो सकता है, जिससे भार का मान कम ही सही पर बदल जाता है इस लिए हाल ही में भार को अलग तरीके से परिभाषित किया गया है।
भविष्य में किलोग्राम को किब्बल या वाट बैलेंस का उपयोग करके मापा जाएगा। एक ऐसा उपकरण जो यांत्रिक और विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा का उपयोग करके सटीक गणना करता है।
ऐसा होने के बाद किलोग्राम की परिभाषा न बदली जा सकेगी और न ही इसे कोई नुकसान पहुँचाया जा सकेगा।यह इलेक्ट्रॉन पंप के माध्यम से किया जाएगा जो एक बार में प्रवाहित विद्युत से औसत करेंट उत्पन्न करता है और विद्युत की गणना करता है।
1 सेकंड -
1 सेकंड वह समय अंतराल है जिसमें सीज़़ियम-133 (Cesium-133) परमाणु द्वारा उत्सर्जित एक विशेष तरंगदैर्घ्य वाले विकिरण (प्रकाश विकिरण) के 9,19,26,31,770 कंपन होते हैं।
यह समय का परमाण्वीय मात्रक कहलाता है।
इसी प्रकार किसी ना किसी चीज को आधार मानकर अन्य मात्रक भी परिभाषित किए गए है जैसे - एम्पियर, केल्विन, केंडेला,मोल ।
बस ध्यान यही रखा जाता है, कि इनका आधार परिवर्तन ना हो, ताकि इनकी परिभाषा यही बनी रहे। और हम जीवन में यही मानक मात्रकों का उपयोग करते रहे।
मन का कोई सवाल या विचार आप कमेंट कर सकते है।manish sharma
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